यह कहानी है पुणे के सदाशिव रामा बोराटे की| उनका जन्म एक ऐसे किसान परिवार में हुआ था जिसके पास बहुत कम कृषि भूमि थी| घर की स्थिति बहुत खराब थी! कई बार तो दो वक्त का खाना जुटाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था| संपूर्ण स्कूली शिक्षा गांव में पूरी हुई| लेकिन बचपन से ही उनका सपना एक कारखाने का मालिक बनने का था! 'जेब में फूटी कौड़ी नहीं और निकल पड़े कारखाने के मालिक बनने' ऐसे ताने सुनते हुए सदाशिव बड़े हुए और आखिरकार एक कारखाने के मालिक बन गये| आज उनके ६ यूनिट्स हैं जिनमें पुणे के भोसरी इलाके में ३, चाकण में १ और सातारा में २ यूनिट्स शामिल हैं| उनका व्यवसाय हर महीने १० करोड़ रुपये से ज़्यादा का कारोबार कर रहा है| उनके साथ ३५० कर्मचारी काम कर रहे हैं|
शेठ वालचंद हीराचंद की कहानियां सुनकर कारखाने के मालिक बनने का सपना देखा
‘अरे बाबा हम किसान हैं| खेती करना हमारा काम है| कारखाना लगाना हमारा काम नहीं है| हमारे बाप-दादाओं ने कभी यह काम नहीं किया| कारखाने का मालिक बनने का ख्याल दिमाग से निकाल दो!’ सदाशिव के घरवाले उन्हें हर वक्त यह कहकर मना करते थे|
खुद अशिक्षित होने के बावजूद माता-पिता ने अपने तीनों बच्चों को स्कूल भेजा ताकि वे पढ़ सकें और आगे चलकर अच्छी सरकारी नौकरी पा सकें| उनके बड़े बेटों को शिक्षा में कोई दिलचस्पी नहीं थी लेकिन सदाशिव को सीखने में मज़ा आता था| सदाशिव अपने परिवार में मैट्रिक पास करने वाले पहले व्यक्ति थे| उनके बड़े भाई सातारा रोड पर स्थित कूपर कंपनी में कार्यरत थे| सदाशिव उनसे शेठ वालचंद हीराचंद की कहानियां सुना करते थे| इसी से प्रेरित होकर सदाशिव कारखाने का मालिक बनने का सपना देखने लगे|
बाद में सदाशिव पढ़ाई के लिए पुणे आ गए| आर्थिक समस्याओं का सामना करते हुए उन्होंने एमएससी मैथेमैटिक्स तक की शिक्षा पूरी की| ऐसे में उनकी इंदापुर के कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी लग गई| लेकिन अपना खुद का कारखाना स्थापित करने की सनक के कारण, उन्होंने उस नौकरी को ठुकरा दिया और अपने आस-पास के सभी लोगों के क्रोध का पात्र बन गए|
ऐन मौके पर पार्टनर के दगा देने के कारण उन्हें अकेले ही फैक्ट्री की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ी
उन्होंने प्लास्टिक मोल्डिंग के क्षेत्र में एक करीबी दोस्त के साथ पार्टनरशिप में एक कारखाना स्थापित करने का फैसला किया| उन्होंने पुणे में भोसरी में एमआईडीसी में १०,००० वर्ग फुट जगह ली| उन्होंने महाराष्ट्र राज्य वित्त निगम से ऋण लिया और कारखाना स्थापित किया| लेकिन ऐन मौके पर पार्टनर ने दगा दे दिया| इसलिए उन्हें अकेले ही फैक्ट्री की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ी| उसी दौरान सदाशिव की शादी भी हो गयी| उनके पास दूसरी जगह लेने के लिए पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने फैक्ट्री में ही अपना संसार बसा लिया|
भोले स्वभाव के कारण बार-बार ठगे गए, लेकिन हार नहीं मानी
हर काम में मुसीबतें और रुकावटें उनका पीछा नहीं छोड़ रही थीं| उन्हें ऐसे कई लोग मिले जो धोखेबाज़, चालबाज़, विश्वासघाती थे| कई लोग उनके भोले स्वभाव का फायदा उठा रहे थे| लेकिन सदाशिव ने अपनी ज़िद्द नहीं छोड़ी| आखिरकार उन्हें कुछ अच्छे लोग मिले| उनके प्रयास सफल होने लगे और काम मिलने लगा| इसी बीच उनका भतीजा उत्तम अपनी पढ़ाई के दौरान उनके साथ रह रहा था| वह उनकी फैक्ट्री में काम करने लगा| वह प्लास्टिक के मोल्ड बनाने में एक्सपर्ट हो गया| सदाशिव को भी उससे मदद मिली| उन्होंने अथक परिश्रम करके प्लास्टिक मोल्डिंग के क्षेत्र में अच्छा नाम कमाया| वे ऑटोमोबाइल क्षेत्र में प्लास्टिक पार्ट्स और कौम्पोनेंट्स के अग्रणी सप्लायर हैं| वोक्स वैगन जैसी कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां उनकी ग्राहक हैं| वे एक अमेरिकी कंपनी के लिए प्लास्टिक के खिलौने बनाकर उन्हें अमेरिका एक्सपोर्ट कर रहे हैं| अब यह बागडोर उन्होंने अगली पीढ़ी को सौंप दी है| उनके सपने पूरे हो गए हैं| उनका कहना है कि ’अगर मैं पूरी ज़िंदगी नौकरी करता रहता तो मुझे वह प्रतिष्ठा और गौरव कभी हासिल नहीं होता जो मुझे आज मिला है|’
सदाशिव की तीन बेटियां और एक बेटा है| उनकी दो बेटियां और बेटा इंजीनियर हैं जबकि एक बेटी एम.बी.ए. है| अब उन्होंने व्यवसाय की बागडोर अपनी इंजीनियर बेटी और बेटे को सौंप दी है|
यदि आपको मूर्ख बनाने वाले चालबाज़ लोग मिले तो निराश न हों
जब सदाशिव से पूछा गया कि वे आज के मराठी युवाओं से क्या कहेंगे, तो उन्होंने कहा, “युवाओं को बड़े सपने देखने की आदत डालनी चाहिए| परिस्थिति अनुकूल हो या प्रतिकूल, बड़े सपने देखना न छोड़ें| लेकिन सिर्फ सपने मत देखो बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयत्न करते रहो| इसमें बहुत सारी बाधाएं और कठिनाइयां आएंगी, आपको मूर्ख बनाने वाले चालबाज़ लोग मिलेंगे| लेकिन इससे आप निराश न हों या आशा न खोएं| निरंतर प्रयास जारी रखिये| हमें विश्वास रखना चाहिए कि जैसे बुरे लोग मिलते हैं, वैसे ही अच्छे लोग भी मिलते हैं|”
व्यवसाय शुरू करने के बाद, deAsra फाउंडेशन बिज़नेस ग्रोथ, Networking और Social Media Marketing के लिए सहायता प्रदान करता है। आप भी इसका लाभ उठा सकते हैं| अधिक जानकारी के लिए आप deAsra से Whatsapp नंबर 93730 35540 पर संपर्क कर सकते हैं|
Notice: This site uses cookies to provide necessary website functionality, improve your experience and analyze our traffic. By using our website, you agree to our legal policies.