Search

छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने वाले देआसरा फाउंडेशन ने पूरे किए १० साल!

उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा देआसरा फाउंडेशन ३१ जुलाई को १० साल पूरे कर लेगा| एक दशक पूरा होने के अवसर पर देआसरा की सीईओ प्रज्ञा गोडबोले का यह विशेष लेख| देआसरा फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य छोटे उद्योगों को सशक्त बनाना, नए रोज़गार पैदा करना और उन लोगों के लिए एक इको-सिस्टम बनाना है जो व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं| इसके लिए प्रेरणा और दूरदर्शिता पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के संस्थापक डॉ. आनंद देशपांडे से मिली| देश में रोज़गार योग्य युवाओं की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है और उसके मुकाबले नौकरियों की संख्या बहुत कम है| हमारे देश में हर साल डेढ़ करोड़ से ज़्यादा नौकरियों की ज़रूरत है| इतनी नौकरियाँ पैदा करना संभव नहीं है| इसका समाधान यह है कि युवाओं को केवल नौकरी की तलाश करने के बजाय उद्योग की ओर रुख करना चाहिए| छोटे व्यवसाय बनाये जाने चाहिए| इन छोटे व्यवसायों में रोज़गार सृजन की अपार क्षमता है|

देश की अर्थव्यवस्था में भी छोटे उद्योगों की हिस्सेदारी बहुत बड़ी है| लेकिन दुर्भाग्य से, हमारे पास इन छोटे व्यवसायों के लिए एक प्रभावी इको-सिस्टम नहीं है| इसी आवश्यकता को समझते हुए डॉ. आनंद देशपांडे ने २०१३ में 'देआसरा फाउंडेशन' की स्थापना की|

१० साल पहले शुरू हुए देआसरा फाउंडेशन के काम का दायरा अब पूरे देश में फैल गया है| उद्यमिता विकास और रोज़गार सृजन अकेले करने का काम नहीं है| इसलिए देआसरा ने देश भर में कई संस्थाओं, संगठनों और व्यक्तियों को अपने साथ जोड़ लिया है| इसके परिणामस्वरूप, देआसरा फाउंडेशन किसी न किसी रूप में २ लाख ४० हज़ार से अधिक लोगों तक पहुंचने में सक्षम हुआ है|

देआसरा उद्यमशीलता की मानसिकता बनाने, वास्तविक व्यवसाय शुरू करने और मौजूदा व्यवसाय का विस्तार करने के सभी चरणों में मदद करता है| हमारी कोशिश होती है कि व्यवसाय शुरू करने के बाद छोटा व्यावसायिक हर महीने कम से कम २० से २५ हज़ार रुपये कमा सके| इस कार्य को हम तीन चरणों में विभाजित करते हैं|

Seed
Soil
Surround
Seed
उद्यमिता की यात्रा में यह चरण सबसे महत्वपूर्ण है| इसमें हम ‘Inspire’ प्रोग्राम के तहत कॉलेज के बच्चों के लिए कई गतिविधियां संचालित करते हैं| हमने हाल ही में एक कॉलेज में एक कार्यक्रम आयोजित किया| उस कार्यक्रम के बाद की प्रतिक्रिया बहुत ज़बरदस्त थी| एक ने कहा, "मुझे नहीं पता था कि व्यावसायिक संदर्भ में कोई ऐसा सोच सकता है| अब मेरी असली यात्रा शुरू हुई है|” उस युवा मित्र की यह प्रतिक्रिया हमारे लिए भी महत्वपूर्ण थी| हम जो बीज बो रहे हैं ये उसके परिणाम हैं| हम इन युवाओं को इंटर्नशिप भी प्रदान करते हैं ताकि उन्हें कुछ वास्तविक कार्य अनुभव मिल सके| अपने डिजिटल प्लैटफॉर्म 'यशस्वी उद्योजक' के माध्यम से, हम सफलता की कहानियों, नए व्यवसायों के बारे में जानकारी, मार्केटिंग के सिद्धांत, वित्तीय अनुशासन जैसी कई चीज़ों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं| इसी तरह, 'उद्योजक कट्टा' के माध्यम से हम उन्हें प्रसिद्ध उद्यमियों के साथ बातचीत करने का अवसर देते हैं|

इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में सही मानसिकता का निर्माण करना और उन्हें अपनी क्षमता और गुणों से अवगत कराना है|
Soil
इसमें देआसरा फाउंडेशन उन सभी लोगों की मदद करता है जो वास्तव में व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक हैं| इसमें विभिन्न सेवाएं शामिल हैं जैसे व्यवसाय योजना बनाना, आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करना, बैंक ऋण के लिए प्रस्ताव बनाना, मार्केटिंग, कैश फ्लो मैनेजमेंट, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, उद्यमियों को सही बाज़ारों से जोड़ना, निर्यात में सहायता प्रदान करना, आदि| चूँकि यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल है, इसलिए आप ये सेवाएं देश में कहीं से भी प्राप्त कर सकते हैं, यहां तक कि घर बैठे भी|

Surround
छोटे उद्यमियों के लिए एक इको-सिस्टम बनाते समय, सही रणनीतियों की योजना बनाने की भी आवश्यकता है| इसी आवश्यकता को समझते हुए पुणे के प्रसिद्ध गोखले इंस्टीट्यूट में 'CEED' (Centre for Excellence in Entrepreneurship and Development) नामक केंद्र की स्थापना की गई है| इस केंद्र के माध्यम से छोटे उद्यमियों के लिए नीतियां बनाते समय शोध करना, विशेषज्ञों को एक साथ लाना और विचार-मंथन करना, लोगों को जागरूक करना, इस काम में सक्रिय संस्थाओं और संगठनों को जोड़कर दबाव समूह का निर्माण करने का काम किया जा रहा है|

इस १० साल की यात्रा में हमारे कुछ अनुभव रोमांचकारी और शिक्षाप्रद रहे हैं| यशस्वी उद्योजक से प्रेरित होकर चंद्रिका किशोर ने अपना खुद का ब्रैंड याद्रा क्विल्ट्स बनाया और अब सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय चला रही हैं| जब हमारी टीम उनकी कहानी जानने उनके पास गई तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए| वे इस बात से अभिभूत थीं कि जिस यशस्वी उद्योजक से प्रेरणा लेकर उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया था, आज वहीं उनका साक्षात्कार हो रहा था| हमने यशस्वी उद्योजक में पल्लवी उटगी की प्रेरणादायक कहानी प्रकाशित की थी, जिसे फोर्ब्स पत्रिका ने भी मान्यता दी थी| आज आलिया भट्ट जैसी एक्ट्रेस उनकी ब्रैंड एंबेसडर है|

यहां तक कि उद्योग मार्केट कनेक्ट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न प्रदर्शनियों, कॉर्पोरेट कंपनियों में स्टॉल्स, बिज़नेस मेलों और एक्सपो से लाभान्वित होने वाले उद्यमियों की संख्या भी बहुत बड़ी है| इससे कई लोगों को व्यवसाय की एक नई दिशा मिली है, कई लोगों को एक नई धुन मिली है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसने उन्हें आत्मविश्वास और नई आशा दी है जो मुझे लगता है कि यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है|

स्टार्टअप को अभी भी केवल टेक्नोलॉजी और बिलियन डॉलर व्यवसाय या ब्रैंड के रूप में देखा जाता है| लेकिन युवाओं को यह बात समझनी चाहिए कि हर व्यवसाय बिलियन डॉलर का व्यवसाय नहीं हो सकता, और इसकी आवश्यकता भी नहीं है| व्यवसाय का सरल, सीधा लेकिन कठिन मंत्र है: आसपास की समस्याओं को देखें और उनका अध्ययन करें, उनका समाधान खोजें, अध्ययन करें कि क्या लोग इसके लिए या उस पर पैसा खर्च करने को तैयार होंगे, और यदि आपको इस प्रश्न का सकारात्मक उत्तर मिलता है, तो अपना व्यवसाय शुरू करें| हम इस मंत्र को ज़्यादा से ज़्यादा युवाओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं|

आत्मनिर्भर भारत के लिए ऐसे छोटे उद्योग बनाना और उनसे नए रोज़गार पैदा करना समय की मांग है| अगले दशक में हम इस काम का दायरा और भी बढ़ाना चाहेंगे| हम जानते हैं कि यह काम अकेले नहीं किया जा सकता| इस मिशन में हमें सभी के सहयोग की ज़रूरत है|

हम भाग्यशाली हैं कि हमें अपनी इस यात्रा में हमें कई संस्थाओं, संगठनों और व्यक्तियों से अमूल्य समर्थन मिला जिनकी मदद के बिना हम इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते| हमारी पूरी टीम की ओर से उन सभी को दिल से धन्यवाद| हम भविष्य में भी इसी प्रकार के समर्थन की आशा रखते हैं|

प्रज्ञा गोडबोले,
सीईओ, देआसरा फाउंडेशन
https://twitter.com/godbole_pradnya