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'लोकल' सोलापुर से 'ग्लोबल वर्ल्डवाइड' तक: दाते पंचांग सौ साल बाद भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है

लगभग सौ साल पहले यानी सटीक तौर पर कहें तो साल १९१६-१७ की बात है| घर की एक दीवार पर सीढ़ी लगायी हुई है और उसकी मदद से एक विद्वान गणितज्ञ दीवार पर गणित कर रहे हैं| छत से लेकर ज़मीन तक दीवार आंकड़ों से सजी हुई है और वे उनका निष्कर्ष निकालने की कोशिश कर रहे हैं| वह पूर्ण हुआ कि दूसरा गणित... लगातार नौ महीने तक ऐसी मेहनत करने के बाद धर्मशास्त्र के साथ ज्योतिष और तिथि-वार का महत्व बताने वाले पंचांग सिद्ध हो पाते हैं| लक्ष्मणशास्त्री दाते ने इस तरह के चरम बौद्धिक प्रयास से दाते पंचांग की नींव रखी और आज उनकी पांचवीं पीढ़ी के ओंकार दाते पंचांग का 'एपीआई' बनाकर नए साल का सम्पूर्ण पंचांग केवल नौ सेकंड में बनाते हैं| पंचांग के क्षेत्र में यह एक बड़ी क्रांति है| दाते पंचांग न केवल सोलापुर-महाराष्ट्र में बल्कि दुनिया में जहां भी कोई मराठी व्यक्ति है, वहां पहुंच गया है| अब इसे एक अत्याधुनिक स्वरूप मिल गया है|

 

शताब्दी पूरी करने वाला यह देश का एकमात्र पंचांग है| ओंकार दाते बता रहे थे, “कम्प्यूटरीकरण से अब पंचांग निर्मिति आसान हो गयी है लेकिन पंचांग की 'बोरलैंड सी' लैंग्वेज बनाना आसान नहीं था| विनय दाते और वेदांग दाते के साथ हमने 'पंचांग एपीआई' विकसित किया| इसमें 'मल्टीलिंगुअल' के लिए पंचांग शब्दकोश जोड़ा गया| इसलिए पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अब सिर्फ अंग्रेज़ी में नहीं बल्कि देवनागरी में भी आते हैं| धर्मशास्त्र, मुहूर्त पहले 'मैन्युअली' फीड करने पड़ते थे| उसका भी 'एपीआई' बनाया| एक 'डेस्कटॉप ओरिएंटेड' प्रक्रिया थी जिसे हमने 'क्लाउड बेस्ड' बनाया| पृथ्वी पर किसी भी स्थान, समय के लिए ४० प्रकार के मुहूर्त, विवाहमेलन हम कम समय में निकालकर देते हैं|”

 

हालांकि ओंकार दाते पंचांग के आधुनिकीकरण में सफल रहे, लेकिन उसमें उनके परदादा श्रीधरपंत दाते का भी योगदान था| उन्होंने 'प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर' का इस्तेमाल शुरू किया| उसके बाद दादा धुंडीराजशास्त्री दाते ने और तरक्की की| पंचांगों में सटीकता लाने के लिए उन्होंने दृष्टि-आधारित गणित की प्रणाली की शुरुआत की| उन्होंने पंचांग में पारंपरिक समय मापने की प्रणाली के बजाय घड़ी प्रणाली का उपयोग करने का एक बड़ा परिवर्तन किया| १९५४ में, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कैलेंडर सुधार समिति का गठन किया, जिसके प्रमुख धुंडीराजशास्त्री थे| वे भारत सरकार के कैलेंडर पर काम करने वाले पहले पंचांग बने| आपातकाल के दौरान धुंडीराजशास्त्री को गिरफ्तार कर नासिक जेल में रखा गया था| उल्लेखनीय बात यह है कि उस साल जब सरकारी कैलेंडर और पंचांग जारी करना मुश्किल हो गया था, तब धुंडीराजशास्त्री को जेल में कैलेंडर और पंचांग बनाने के लिए विशेष सुविधा दी गई थी| ओंकार के पिता मोहनराव दाते ने भी पंचांग को और अधिक जनोन्मुखी बनाने के लिए इसे दिनदर्शिका और दिनविशेष पुस्तिका का रूप दिया| विनय, ओंकार और वेदांग ने फेसबुकट्विटरइन्स्टाग्रामटेलिग्राम पर दाते पंचांग पहुंचा दिया| इन सोशल मीडिया पर दाते पंचांग के लाखों 'फॉलोअर्स' हैं| इसी तरह, दाते पंचांग की कई सेवाएं बिझनेस व्हाटसऍप और टेलीग्राम चैनल्स पर भी उपलब्ध कराई गयी हैं| 

दाते पंचांग के सोशल मीडिया 'प्लैटफॉर्म' का दुनिया भर में कई लोग उपयोग कर रहे हैं| एक ही साल में लगभग पंद्रह हज़ार लोगों ने रजिस्ट्रेशन किया है| दीवार से पांडुलिपियों तक और वहाँ से वेबसाइट और विभिन्न सोशल मीडिया पर पहुँचने वाले दाते पंचांग की शुरुआत उस समय सोलापुर जैसे छोटे से गांव में हुई थी| अब यह 'ग्लोबल' हो गया है| सौ सालों में 'लोकल' से 'ग्लोबल' तक का सफर तय करने वाले दाते पंचांग की मुद्रित प्रतियां आज भी लोकप्रिय हैं| हर साल इसकी करीब चार लाख प्रतियां छापी जाती हैं| इससे करीब तीन करोड़ का कारोबार होता है| पॉकेट पंचांग की एक लाख प्रतियां बिकती हैं जबकि पौन लाख कैलेंडर बिकते हैं| यह सफलता वस्तुतः अविश्वसनीय है| लेकिन दाते पंचांग की विश्वसनीयता अपार है| दाते पंचांग के 'फेसबुक पेज' को एक लाख से अधिक 'हिट्स' मिले हैं|

 

“नई पीढ़ी पंचांग में विश्वास रखती है”, इस बात पर ज़ोर देते हुए ओंकार दाते कहते हैं, “दुनिया भर में नई पीढ़ी के युवाओं को पंचांग से त्योहारों और तिथियों की जानकारी मिलती है| लेकिन वे त्योहार मनाना नहीं जानते| उसके लिए हम पंचांगकोश विकसित कर रहे हैं| इसे पंचांग विकिपीडिया कहा जा सकता है| उसमें ऑडियो और वीडियो का इस्तेमाल किया जाएगा| उन्हें पता चल जाएगा कि त्योहार कैसे मनाएं|”

 

पंचांग से ज्योतिष बताने वाले या विवाहमेलन के बारे में जानकारी देने वाले गुरुजी को भी अब ऑनलाइन पंचांग की सुविधा देने के लिए 'सबस्क्रिप्शन बेस्ड’ सेवा शुरू की गयी है| पंद्रह वर्षों से पंचांग के आधुनिकीकरण का कार्य चल रहा है| और अब मराठी और अंग्रेज़ी इन दो भाषाओं में वेबसाइट तो बन गयी है| इन दो भाषाओं के अलावा कन्नड, गुजराती और हिंदी जैसी भाषाओं में पंचांग की सुविधा दी जा रही है| 'दाते पंचांग एंड्रॉइड नेटिव ऍप' द्वारा दस देशों के कैलेंडर मुफ्त में प्रदान किये जा रहे हैं| पंचांग और कैलेंडर पूरी तरह से ' ऑटोमेटेड' हैं|

 

प्रूफ रीडिंग से लेकर अन्य सभी प्रक्रियाओं के लिए अब मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, सभी को यंत्रीकृत कर दिया गया है| लोकमान्य तिलक का मत था कि 'पंचांग में आकाश का दर्पण दिखना चाहिए', लक्ष्मणशास्त्री से लेकर विनय, ओंकार तक दाते की पाँच पीढ़ियों ने उस वाक्य को साकार करके दिखाया है| पंचांग आम आदमी से लेकर विद्वानों तक सभी के लिए उपयोगी है| जबकि गणित हर जगह समान था, अलग-अलग पंचांगों में एकमत नहीं था| दाते परिवार उसमें समन्वय लाया और उसे समुदाय उन्मुख बनाया| सूर्योदय-सूर्यास्त के समय से लेकर विवाहमेलन और जन्मकुंडली से लेकर ग्रहणों तक, सभी में संगतता पायी जाती है| आवश्यकता और व्यवसाय के कारण ही दाते पंचांग बदलता गया| अब ऑनलाइन सुविधाओं के चलते दुनिया भर की सभी तरह की मुद्राओं के लिए 'पेमेंट मोड' रख दिया गया है|

 

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रजनीश जोशी

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